युद्ध की वजह से प्रकृति संकट में भारत को नेतृत्व करना चाहिए -डॉ.सिनकर
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ प्रशांत सिनकर का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
को पत्र भारत को 'पर्यावरण शांति' के लिए आगे आना चाहिए।
ठाणे। इस समय दुनिया बेहद अस्थिर और चिंताजनक स्थिति से गुजर रही है और विभिन्न देशों के बीच संघर्ष और युद्ध जैसे तनाव ने मानव जीवन के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। प्रकृति,पर्यावरण और वन्य जीवन इस लड़ाई में संकट से पीड़ित' हैं। उनके दर्द को वैश्विक स्तर पर नहीं सुना जा रहा है। खेद व्यक्त करते हुए ठाणे के पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत सिनकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है।
डॉ. सिनकर ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा, युद्ध केवल सीमाओं या राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई नहीं है। प्रकृति के खिलाफ सबसे बड़ा अत्याचार है। आधुनिक हथियारों का उपयोग,रासायनिक प्रदूषण और बड़े पैमाने पर विस्फोट हजारों एकड़ जंगलों को नष्ट कर रहे हैं। नदियों को जहरीला बना रहे हैं। जबकि इस लड़ाई से वन्यजीवों का कोई लेना-देना नहीं है। वह अपना निवास स्थान खो रहे हैं। पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है।
भारत 'वसुधैव कुटुंबकम' के मूल्य पर आधारित देश है और 'मिशन लाइफ' के माध्यम से दुनिया को टिकाऊ जीवन शैली का संदेश दे रहा है। इस पृष्ठभूमि में, डॉ. सिंकर ने 'पर्यावरणीय शांति निर्माण' का एक नया दृष्टिकोण सामने रखा है। साथ ही मांग किया है कि भारत युद्धकालीन पर्यावरणीय क्षति को 'मानवीय अपराध' घोषित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहल करे। उन्होंने इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से एक विशेष तकनीकी कार्य समूह स्थापित करने का भी सुझाव दिया है।
उन्होंने यह भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है कि युद्धग्रस्त सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन करने वाले जंगली जानवरों के लिए सुरक्षित मार्ग बनाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौता किया जाना चाहिए। युद्ध के बाद उन क्षेत्रों में जैव विविधता को बहाल करने के लिए एक 'पारिस्थितिकी बहाली कोष' की स्थापना की जानी चाहिए।
डॉ. सिनकर ने अपने पत्र के अंत में कहा,अगर यह धरती ही रहने लायक नहीं रह गई, तो कोई भी जीत या प्रगति निरर्थक होगी। भारत की संस्कृति प्रकृति-पूजक है। इसलिए,भारत के लिए समय की मांग है कि वह दुनिया को 'सृजन बचाओ' का संदेश देने के लिए प्रभावी नेतृत्व करे, न कि केवल युद्ध पर प्रतिबंध लगाए।
इस पत्र के माध्यम से उन्होंने विश्व शांति के साथ-साथ 'पर्यावरण शांति' का एक नया और अत्यंत महत्वपूर्ण विचार दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है।
Reviewed by Dinesh Shukla
on
मार्च 24, 2026
Rating:



